बृहत्संहिता में भूगर्भ जलविद्या
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Keywords

Valmik
Groundwater
Jaladharaka
Dakargal

How to Cite

Patel, T. (2015). बृहत्संहिता में भूगर्भ जलविद्या: Geology of Brihat Samhita. Dev Sanskriti Interdisciplinary International Journal, 6, 25-30. https://doi.org/10.36018/dsiij.v6i0.63

Abstract

जल ही जीवन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन का प्रारम्भ ही जल से हुआ है। जल की आवश्यकता मनुष्य को नित्य प्रति पड़ती है। इसके बिना जीवन नहीं चल सकता। इसलिये मानव सभ्यता का विकास ही नदियों के तट पर हुआ। कालांतर में जनसंख्या बढ़ती गयी और जल संग्रहण के नये उपादान बनते गये और मनुष्य नदियों तट से हटकर दूर स्थानों में बसने लगे। जिसके फलस्वरूप कुओं की संस्कृति का विकास हुआ। वर्तमान समय में कुओं और नदियों का पानी पीने योग्य ही नहीं रह गया है। आज मानव पीने के पानी के लिये भूगर्भ जल पर ही निर्भर है, अतः इस युग में स्वादिष्ट व प्रचुर भूगर्भ जल कहाँ प्राप्त होगा, इसका ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। आचार्य वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रन्थ बृहत्संहिता में भूगर्भ जल विद्या का वैज्ञानिक और विस्तृत वर्णन दिया गया है। बृहत्संहिता में वर्णित लक्षणों द्वारा, मानव समाज भूगर्भ जल प्राप्त कर लाभान्वित हो सकता हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में बृहत्संहिता के अनुसार भूगर्भ जल की परिभाषा, जल चिन्हों का वैज्ञानिक प्रतिपादन, वृक्ष तथा बाँबी के लक्षण से जल विचार, तृण शाकादि के द्वारा जल विचार, भू-लक्षण के अनुसार जल विचार, अन्य चिन्हों से जल विचार एवं जल शोधन की विधि के बारे में उल्लेख किया गया है। आधुनिक युग में भूमि गत जल के लिये मनुष्य ट्यूबेल खुदवाते हैं किंतु कई जगह में उन्हें सफलता प्राप्त नहीं होती, जिसके कारण पैसे, श्रम व समय की बर्बादी के साथ निराशा के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता। यदि बृहत्संहिता में दिये गये भू गर्भ लक्षण के अनुसार कुआँ अथवा ट्यूबेल खुदवायें तो सफलता प्राप्त होने की अधिक सम्भावना बनती है।

Water is life. Scientists say that life has started with water. Human beings need water every day. Life cannot exist without it. That is why human civilization has evolved on the banks of rivers. Over the years, the population increased and new products of water collection were formed and humans moved away from the rivers and settled in far off places. As a result, the culture of wells developed. At the present time, the water of wells and rivers is no longer drinkable. Today, human beings are dependent on groundwater for drinking, thus it is notable to understand that from where abundant groundwater will be acquired. Scientific and detailed description of underground hydrology is given in the book Brihatsamhita, composed by Acharya Varahamihira. By the symptoms described in Brihat Samhita, human society can be benefited by getting ground water. According to Briha Sanshita in the paper presented, the definition of groundwater, scientific rendering of water signs, water idea by tree and bamboo signs, water idea by Trinidad, water idea according to land feature, water idea by other signs and water treatment Method has been mentioned. In the modern era, humans have dug up the tube well for groundwater, but in many places they do not get success, due to which there is nothing except disappointment with waste of money, labor and time. If the well or tube well is dug according to the symptoms of the ground given in Brihat Samhita, then there will be a greater chance of success.

https://doi.org/10.36018/dsiij.v6i0.63
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