आपदाकाल में सकारात्मक संचार : कोरोना संकट काल के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन
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Keywords

आपदा
सकारात्मक संचार
सकारात्मक पत्रकारिता
Disaster
Positive Communication
Positive Journalism
COVID19

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Kumar, D., & Kumari, L. (2020). आपदाकाल में सकारात्मक संचार : कोरोना संकट काल के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन: Study of Positive communication during a disaster: With the special reference to the COVID19 pandemic. Dev Sanskriti Interdisciplinary International Journal, 16, 39-47. https://doi.org/10.36018/dsiij.v16i.165

Abstract

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जबकि समाज परिवर्तनशील है। सामाजिक परिवर्तन कई बार मानव के लिए सुखद परिस्थिति लाता है तो कई बार संकट कालीन स्थिति। आपदा काल में मनुष्य को ऐसे ही संकटों का सामना करना पड़ता है। ऐसे संकट काल से उबरने में समाज को कई बार काफी समय लगता है, तो कई बार वह जल्द ही परिस्थितियों को अनुकूल बना लेता है। ऐसे आपदाकाल की विषम परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में सकारात्मक संचार का विशेष योगदान रहा है। वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना वायरस के संकट से गुजर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे जनवरी 2020 में वैश्विक आपदा घोषित किया है। भारत भी कोरोना संकट से अछूता नहीं रहा। भारत में २२ मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसके बाद से ही पूरे भारत में लॉकडाउन का क्रम जारी हुआ और इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया। भारतीय जनता ने प्रथम बार ऐसे संकट का सामना किया। जिसमें उसे ज्ञात ही नहीं की ऐसे संकट से कैसे उबरा जाए। सुनसान सडकें, सुनसान गांव-शहर, मानो मानव पिजड़े में कैद हो। ऐसा दृश्य इससे पहले कभी किसी ने नहीं देखा। ऐसे समय में संचार-सूचनाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होता है। जैसी सूचना होगी, जैसा संचार होगा मनुष्य उसी ओर आकर्षित होता है। पत्रकारिता के माध्यम से जनसंचार होता है एवं सूचनाएं सभी तक पहुंचती हैं। ऐसे में सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों तरह के संचार देखने को मिलें। नकारात्मक संचार जहां भय, तनाव, हिंसा आदि के भाव जगाता है वहीं सकारात्मक संचार निर्भयता, साहस, सुख-आनन्द, आदि का संचार करता है। यहां सकारात्मक संचार के उदाहरणों से यह समझने का प्रयास किया गया कि संकट काल में किस-किस तरह के सकारात्मक संचार संभव है। कोरोना संकट काल में सकारात्मक संचार की भूमिका का अध्ययन किया गया है।

Man is the Social animal of the constantly changing society. Social changes sometimes bring pleasant conditions for human beings and sometimes crises. In a disaster, human beings face similar crises. It often takes a lot of time for society to recover from such a crisis; many times it makes the conditions favorable again. In such a disaster, positive communication has played a special role in adapting to the crisis. Currently, the whole world is going through the crisis of coronavirus COVID19 pandemic (in the first half of year 2020). The World Health Organization declared it as a global disaster in January 2020. India also not remained untouched by the COVID19 pandemic. Janata Karfu (self-imposed quarantine) was imposed in India on 22 March 2020. Since then the order of lockdown was issued throughout India and it was declared as a national disaster. The Indian public has not faced such a crisis in modern times and they do not know how to overcome such a crisis. Deserted roads, deserted villages - cities, as if imprisoned in humans are resultant of the corona crisis period. No one has ever seen such a scene before. In such times, communication and information make a very important contribution. People are attracted by the nature of information and communication takes place.  Mass communication carries through journalism and information reaches everyone. In such a situation, both positive and negative communication should be seen. While negative communication awakens feelings of fear, tension, violence, alertness to some extent, etc., positive communication brings fearlessness, courage, happiness, joy, etc. In this research paper researchers due have given rationale examples of positive communication. Through this paper, researchers have explored the various role of positive communication in a possible crisis time. The role and presence of positive communication during Corona crisis period studied in this paper.

 

https://doi.org/10.36018/dsiij.v16i.165
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